आठ वर्ष का हुआ कविता कोश

आठ वर्ष का हुआ कविता कोश

इस वर्ष में हमनें राजस्थानी, भोजपुरी और मैथिली के विभागों को उन्नत कर लिया है। आगे हम हरियाणवी, अवधी, बुंदेलखंडी और छत्तीसगढ़ी विभागों पर विशेष ध्यान देंगे।

नंदा की आँखें बातें करती थीं

नंदा… आप हमेशा याद रहेंगी… मेरी ओर से भावभीनी विदाई।

ये तमाम गीत नंदा के अभिनय की ऊँचाई और उनके रूप के उजाले को बखूबी सामने रखते हैं। मेरे ख़्याल से नंदा एक under-rated अभिनेत्री ही रहीं। उनके और उनके अभिनय के बारे में उतना विमर्श नहीं हुआ जितना उनकी समकालीन अन्य अभिनेत्रियों के बारे में होता रहा है।

ठेठ हिन्दुस्तानी भाषा और उसकी संस्कृति

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कविता कोश के संदर्भ में कई बार कुछ रोचक प्रश्न सामने आ खड़े होते हैं। आजकल मैं इसी तरह के एक प्रश्न पर विचार कर रहा हूँ कि क्या शेख़ बाक़र अली चिरकीन की रचनाएँ कोश में शामिल की जाएँ। चिरकीन अपने समय के एक बहुत जाने-माने शायर थे। उनकी रचनाएँ लोगों को काफ़ी पसंद […]

कविता कोश को अक्षरम‌ सम्मान

प्रवासी दुनिया और अक्षरम्‌ ने एक अच्छी और ज़रूरी शुरुआत कर दी है –अब देखें कि आगे क्या होता है। बहरहाल आगे जो भी हो लेकिन कविता कोश को जनसामान्य का जो बेपनाह प्रेम हांसिल है –वह प्रेम तो बेशक सब सम्मानों से बड़ा सम्मान है।

आलोक नाथ, चुटकुले और सोशल मीडिया

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सोशल मीडिया एक बहुत ताकतवर चीज़ है क्योंकि इससे करोड़ों लोग जुड़े हैं और इन सब लोगों के लिए अपनी-अपनी आवाज़ इस माध्यम के ज़रिए उठाना बेहद आसान है। इन करोड़ों लोगों में हर तरह की प्रकृति व प्रवृत्ति के लोग होते हैं। यहाँ लोग विभिन्न निजी उद्देश्यों के कारण उपस्थित रहते हैं; और आजकल […]

समलैंगिकता अपराध है?

समलैंगिक यौन संबंध और सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला

हमारे समाज की निगाह से देखें तो इंद्रधनुष एकरंगी ही होता है… अन्य सभी रंगो को अपना चोला बदलते हुए उसी रंग में रंगना होता है जो समाज को सही लगता है… लेकिन ऐसी सोच से प्राकृतिक सत्य नहीं बदल जाते… इंद्रधनुष तो आदिकाल से बहुरंगी था, है और रहेगा… किसी समाज की पसंद-नापसंद से प्राकृतिक सत्य नहीं बदलते।

आम आदमी पार्टी की झाड़ू

आम आदमी पार्टी की जीत

दिल्ली में भाजपा नहीं जीती है… हाँ, कान्ग्रेस की हार ज़रूर हुई है… दिल्ली में हुए चुनावों का सच यही है कि वास्तविक जीत “आम आदमी पार्टी” की हुई है। मैं इसे अरविन्द केजरीवाल की जीत नहीं बता रहा क्योंकि यह वास्तव में आम आदमी की जीत है। सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दूँ […]

समानता कहाँ है इस देश में?

श्रेयस नवारे द्वारा बनाया गया कार्टून। हिन्दुस्तान टाइम्स (7 दिसम्बर 2013)

आज के हिन्दुस्तान टाइम्स में छपा श्रेयस नवारे का यह कार्टून मन को छू गया। इस कार्टून में स्वर्ग पहुँचे नेल्सन मंडेला का स्वागत अल्बर्ट आइंस्टीन कर रहे हैं। मंडेला अपने समीकरण “Black = White” के साथ स्वर्ग पहुँचे हैं। आइंस्टीन उनसे कह रहे हैं कि “your equation is far more important than mine” मैं […]

विदा नेल्सन मंडेला

जेल में अपने कमरे को देखने के लिए 1994 में वापस लौटे नेल्सन मंडेला की एक तस्वीर। Getty Images

शायद दक्षिण अफ़्रिका की मिट्टी में ही कुछ ख़ास बात है कि उससे महात्मा बनते हैं… और यह मिट्टी महात्माओं का सम्मान करना भी जानती है। विदा नेल्सन मंडेला… आज एक और माहत्मा गांधी की मौत हो गई है।

बॉलीवुड फ़िल्मों में धूम्रपान

बॉलीवुड फ़िल्मों में धूम्रपान

अनुराग कश्यप का धूम्रपान के विरोध में दिखाए जाने वाले संदेशों के बारे में बयान दुखद है। सेलेब्रिटिज़ को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए।

हिन्दी का संकोच… और अंग्रेज़ी के संकेत!

हिन्दी का संकोच

मेरे एक परिचित हैं जो फ़ोन पर बड़े ज़ोर-ज़ोर से बातें करते हैं। जब वे फ़ोन पर हों तो उनकी आवाज़ अपने-आप ही दुगनी (या शायद तिगुनी) ऊँची हो जाती है। इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि उनकी बातें आस-पास सभी को मजबूरन सुननी पड़ती हैं। आज वे जाने किससे बातें कर रहे थे। बातचीत के […]

तेंदुलकर, ध्यान चंद, राजनीति और भारत रत्न

मेजर ध्यान चंद भारत के रत्न हैं [तस्वीर: जय महाराष्ट्र न्यूज़]

सचिन तेंदुलकर एक जगमगाते और लम्बे करियर के बाद रिटायर हो चुके हैं। क्रिकेट से सन्यास लेने पर पूरे देश ने उन्हें भावुक विदाई दी और सरकार ने उन्हें दिया भारत रत्न होने का सम्मान। सचिन को मिले इस सम्मान के बाद से काफ़ी बहस चल रही है। इसी विषय पर मैं भी कुछ लिखना […]

पासवर्ड: हैकिंग का खतरा और बचाव

अपने पासवर्ड को चोरी से बचाएँ

कल एक मित्र अमित जैन का संदेश आया। अमित ने लिखा “सूचनाओ के इस दौर में Password की बहुत अहमियत है ..क्यों ना आप एक लेख के माध्यम से कुछ इस पर भी लिखे” हालांकि विषय महत्तवपूर्ण है लेकिन इस पर काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है और मैं भी अपनी तकनीकी लेखों की वेबसाइट […]

“कौन कहता है आस्मां में”…

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“द टाइम्स ग्रुप” और “फ़ॉरवर्ड प्रेस” के साथ कार्य करने वाले मुकेश तिवारी ने इस वर्ष शायद जून महीने के एक दिन अचानक मुझे ईमेल भेजा। इस ईमेल से पहले मुकेश के साथ मेरी बात हुई हो -ऐसा मुझे याद नहीं आता। ईमेल में मुकेश ने मुझसे मिलने और “फ़ॉरवर्ड प्रेस” पत्रिका की ओर से […]

मन्ना डे… तू संगीत का सागर है…

दशमलव के कुछ पाठकों ने संदेश भेजकर कहा कि मन्ना डे के बारे में लेख का इंतज़ार है। मैं आज सुबह कुछ देर से काम शुरु कर पाया क्योंकि इंटरनेट कनेक्शन ठीक से बर्ताव नहीं कर रहा था। जब कनेक्शन ठीक हुआ और मैंने इंटरनेट पर आज की हेडलाइन्स पढ़ीं तो ज्ञात हुआ कि मन्ना […]

स्वयंसेवा बेहतर समाज की कुंजी है

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अभी कुछ दिन पहले मुझे आई.आई.टी. दिल्ली में एक वक्तव्य देने के लिए आमंत्रित किया गया था। देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों से आए करीब 60 विद्यार्थियों को अपने एक घंटे के वक्तव्य में मैंने स्वयंसेवा की ज़रूरत और इसके महत्त्व के बारे में जानकारी दी। आज एक सहकर्मी से बातचीत के दौरान मुझे […]

क्या आप अपने बच्चों के लिए मार्गदर्शक तारा हैं?

अपनी बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास करना अभिभावकों और शिक्षकों की ज़िम्मेदारी है।

आज आखिरकार दामिनी से बलात्कार के दोषी “बच्चे” को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सज़ा सुना दी। कानून के अनुसार उसे अधिकतम संभव सज़ा मिली है। तीन वर्ष के लिए इस बच्चे को बाल-सुधार गृह में रखा जाएगा लेकिन उसके बाद यह बलात्कारी फिर से हमारे बीच खुला घूमता दिखाई देगा। जिन छह पशुओं ने दामिनी […]

‘मुकेश’ जैसा कोई न मिल सकेगा

आज हर दिल अजीज़ और दर्द भरे गीतों के सम्राट मुकेश चंद माथुर की पुण्यतिथि है। मुकेश का जन्म लुधियाना में 22 जुलाई 1923 को हुआ था और 27 अगस्त 1976 को अमेरिका के डेट्राइट शहर में काल ने उन्हें हमसे छीन लिया। मुकेश की आवाज़ में कुछ ऐसी कशिश थी कि उनके गाए गीत […]

चलो यात्रा यात्रा खेलते हैं

हमारे देश के मानस पर धर्मांधता की इतनी अधिक पकड़ है कि ग़रीबी और विकास जैसे मुद्दे अक्सर इसके सामने गौण हो जाते हैं। धर्म से ग़रीबी नहीं मिटती… भूखे के पेट में अनाज नहीं जाता… बिजली, पानी की व्यवस्था नहीं होती। और वैसे भी कहा गया है कि भूखे पेट न होई भजन गोपाला। […]

दिल की दुनिया ग़रीब हो गई है

13 अगस्त 2012 को मैंने अपनी डायरी में कुछ लिखा था और लिखने के बाद उसे फ़ेसबुक पर भी डाल दिया था। आज अनुपमा ने जाने कहाँ से वह पन्ना फ़ेसबुक पर खोजकर उसकी याद दिला दी। अब उस पन्नें को दशमलव के पाठकों के सामने भी रख रहा हूँ: ======== ललित दुनिया के हाट […]

त्यौहार आज या कल? नए ज़माने की नई दुविधाएँ

रक्षाबंधन का पावन पर्व

अपने स्कूल के दिनों में मैं अक्सर सोचा करता था कि विदेशी धरती कैसी होती होगी –क्या उतनी ही सख़्त, धूल-भरी, पथरीली, रेतीली, मुलायम, पोली जैसी कि हमारे आस-पास अलग-अलग जगह दिखाई देती है? क्या उस धरती पर चलते हुए वैसा ही लगता होगा जैसा कि यहाँ मेहरौली की गलियों में चलते हुए लगता है? […]

कविता कोश में टॉप 315 रचनाकार

कविता कोश में टॉप 315 रचनाकार

आज कविता कोश परियोजना को चलते हुए सात वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर पिछले वर्ष के बारे में कुछ जानकारियाँ देते हुए मैंने यह लेख लिखा है। अब मैं आपके सामने कविता कोश में सर्वाधिक देखे गए 315 रचनाकारों के नामों की सूची रख रहा हूँ। यह सूची इस बात पर आधारित […]

कविता कोश के सात वर्ष

कविता कोश के सात वर्ष

आज कविता कोश परियोजना को शुरु हुए सात साल पूरे हो गए। इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों सहित उन सभी योगदानकर्ताओं को हार्दिक बधाई जिन्होंने किसी न किसी रूप में इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया। आज मेरे लिए भी गर्व करने व दो पल आराम से बैठ पीछे मुड़कर देखने का दिन […]

सुनिए! विकलांगता छुपाने की चीज़ नहीं है!

चीन की दीवर के मू तियान यू नामक सेक्शन पर मैं

पिछले कुछ महीनों से मैंने अपनी एक काफ़ी पुरानी तस्वीर का प्रयोग इंटरनेट और प्रिंट में आरम्भ किया है। यह तस्वीर मेरे एक मित्र ने 2005 में तब खींची थी जब मैं बीजिंग से करीब 100 किलोमीटर दूर चीन की दीवार पर खड़ा था। इस तस्वीर में मेरा पूरा शरीर दिखता है और चूंकि मैं […]

साहित्य की चोरी… बरजोरी…

साहित्य की चोरी जोरों पर है

आज एक चिठ्ठी मिली… पंजाब के किसी गांव में रहने वाले एक व्यक्ति ने कविता कोश निदेशक के नाम इस ख़त में मुझे बताया कि उनकी (और उनके जैसे कवियों की) रचनाएँ जिले के कुछ दबंग लोग अपने नाम से कवि-सम्मेलनों में सुना देते हैं और वे कुछ नहीं कर पाते। चिठ्ठी लिखने वाले ने […]